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Root Pruning क्या है? क्यों ज़रूरी है और कैसे करें सही तरीके से

Root Pruning (रूट प्रूनिंग) बागवानी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और कंटेनर गार्डनिंग में इसकी विशेष भूमिका होती है। यह सामान्य प्रूनिंग से पूरी तरह अलग तकनीक है, और इसे करते समय कुछ लोग अक्सर गलतियाँ कर देते हैं।

यदि रूट प्रूनिंग सही समय पर की जाए, तो यह:

कई पौध प्रेमी मुझसे अक्सर ये प्रश्न पूछते हैं:

  1. रूट प्रूनिंग क्यों ज़रूरी है?

  2. रूट प्रूनिंग कैसे करें?

  3. रूट प्रूनिंग के लिए सबसे अच्छा मौसम कौन-सा है?

  4. रूट प्रूनिंग से पहले और बाद में किन सावधानियों का पालन करना चाहिए?

  5. यदि समय पर रूट प्रूनिंग न की जाए तो क्या होता है?

  6. पौधों में रूट प्रूनिंग की आवश्यकता के क्या लक्षण होते हैं?

इस लेख में मैंने रूट प्रूनिंग से जुड़े सभी बुनियादी और उन्नत प्रश्नों के समाधान साझा किए हैं।

Root Pruning (रूट प्रूनिंग) क्या है? What is Root Pruning?

रूट प्रूनिंग तब करते हैं जब किसी पौधे की जड़ें गमले के नीचे से बाहर निकलने लगती हैं या फिर ऊपर मिटटी से भी उसकी जड़ें दिखने लगती हैं. ऐसी स्थिति में हम पौधे की जड़ों को काटते हैं जिसको हम रुट प्रूनिंग कहते हैं।

पौधे की रुट प्रूनिंग करते हुए

इस तरीके में:

इससे पौधे को स्वस्थ रहने और बेहतर तरीके से बढ़ने में मदद मिलती है।

रूट प्रूनिंग की क्या ज़रूरत है?

रूट प्रूनिंग की ज़रूरत मुख्य रूप से कंटेनर गार्डनिंग में होती है, जहाँ पौधों को ज़मीन के बजाय गमलों या कंटेनरों में उगाया जाता है।

गुड़हल के पौधे में Root bound

ऐसा तब होता है जब जड़ें गमले के अंदर कसकर चिपक जाती हैं और गोल होने लगती हैं।

अगर पौधे में रुट बाउंड हो जाएं तो क्या करें?

ZZ में रुट बाउंड

अगर किसी पौधे में रुट बाउंड हो जाये, तो इसके तीन उपाय हैं:

1. बड़े गमले में लगाएँ,

बड़े पौधे जो पहले से ही बड़े गमलों में हैं और जिन्हें और बड़े कंटेनर में नहीं रखा जा सकता, उनके लिए दूसरा तरीका ज़रूरी है।

2. ज़मीन में ट्रांसप्लांट करें

पौधे को उसके मौजूदा गमले से निकालें और ज़मीन में ट्रांसप्लांट करें।

3. रूट प्रूनिंग करें – 

उन पौधों के लिए उपयुक्त है:

रूट प्रूनिंग बनाम हार्ड प्रूनिंग – क्या अंतर है?

रूट प्रूनिंग और हार्ड प्रूनिंग बागवानी में इस्तेमाल होने वाली दो अलग-अलग तकनीकें हैं।

रूट प्रूनिंग (Root Pruning)

इसमें पौधे की जड़ों को काटना शामिल है, बिना उसके ऊपर के हिस्सों जैसे तने, डालियों या फूलों को नुकसान पहुँचाए

हार्ड प्रूनिंग (Hard Pruning)

किन पौधों की रूट प्रूनिंग (Root Pruning) की जा सकती है?

रूट प्रूनिंग के लिए सही पौधे:

(i) बारहमासी पौधों के लिए उपयुक्त, खासकर उन पौधों के लिए जो गमलों में उगाए जाते हैं, जैसे:

(ii) मौसमी पौधों की रुट प्रूनिंग नहीं की जाती है – 

रूट प्रूनिंग के लिए सबसे अच्छा मौसम

रूट प्रूनिंग के लिए सबसे अच्छा समय है:

ज़रूरी नोट:

रूट प्रूनिंग की ज़रूरत बताने वाले लक्षण:

1. गमले से जड़ें निकलने लगती हैं,

2. बहुत दिनों से पौधे तनाव में होते हैं,

3. दोबारा गमले में लगाते समय जांच करें

रूट प्रूनिंग करते समय सावधानियां

1. चेक करें कि मिट्टी न तो बहुत गीली हो और न ही बहुत सूखी।

2. अगर आपने हाल ही में पौधे को पानी दिया है, तो ज़्यादा नमी से बचने के लिए रूट प्रूनिंग से पहले कुछ दिन इंतज़ार करें।

3. शाम को रूट प्रूनिंग करें।

4. रूट प्रूनिंग करने से पहले अपने प्रूनिंग टूल्स को साफ़ और सैनिटाइज़ करें।

5. कॉन्फिडेंस बढ़ाने के लिए पहले छोटे, मज़बूत पौधों से शुरुआत करें।

6. जब आपको अपनी काबिलियत पर कॉन्फिडेंस हो, तब रूट प्रूनिंग की प्रैक्टिस करें।

रूट प्रूनिंग कैसे करें (How to Do Root Pruning (Step-by-Step)

1. पौधे को गमले से निकालने के लिए, जड़ों को नुकसान से बचाने के लिए उसे मिट्टी के साथ धीरे से खींचें।

2. मिट्टी को ढीला करने के लिए गमले के किनारों पर थपथपाएं।

3. जड़ों को देखते समय, सफेद रंग नई ग्रोथ दिखाता है, जबकि भूरी या काली जड़ें पुरानी होती हैं।

4. दो तरह की जड़ें दिखाई दे सकती हैं: पतली जड़ें और तने जैसी जड़ें।

 रुट प्रूनिंग के बाद मिट्टी कैसे तैयार करें

1. रुट प्रूनिंग के बाद, पौधे थोड़ा स्ट्रेस महसूस कर सकते हैं।

2. इसलिए, छोटे पौधों के लिए, आप पुरानी मिट्टी को साफ करने के बाद उसका दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं। बस गमले में साफ की हुई मिट्टी भर दें; एक्स्ट्रा कम्पोस्ट, फर्टिलाइजर या फंगीसाइड की ज़रूरत नहीं है—पुरानी मिट्टी ठीक काम करती है।

3. बड़े गमलों के लिए, ताज़ा मिट्टी का मिक्सचर इस्तेमाल करें, जिसमें ये चीज़ें मिलाएं: वर्मीकम्पोस्ट, फंगीसाइड, रेत, कोकोपीट और नीम केक पाउडर।

4. पौधे की जड़ों के पास पुरानी मिट्टी का मिक्सचर दोबारा इस्तेमाल करें। इस्तेमाल करने से पहले, बस मिट्टी के मिक्सचर को साफ कर लें।

दोबारा गमले में लगाने के बाद क्या करना चाहिए?

दोबारा गमले में लगाने के बाद, मिट्टी को बैठने के लिए गमले को हल्के से थपथपाएं, उसे हिलाएं नहीं।

1. ठीक से पानी दें और पानी में थोड़ा सा फंगीसाइड मिलाएं।

2. पौधे को छाया में रखें, उसे सीधी धूप से दूर रखें। रुट प्रूनिंग के बाद, पौधे को 4-5 दिन बाद तक स्ट्रेस हो सकता है।

3. पौधे को कम पानी दें, और 1-2 इंच की गहराई पर मिट्टी में नमी का लेवल चेक करें।

4. पौधे को 20-25 दिन तक बिना किसी छेड़-छाड़ के ठीक होने दें।

5. एप्सम सॉल्ट, प्याज के छिलके का लिक्विड फर्टिलाइजर या कोई और फर्टिलाइजर देने से बचें।

तो, यह पूरी जानकारी पौधों की रूट प्रूनिंग के बारे में थी। अपने पौधों को हेल्दी रखने के लिए सभी ज़रूरी स्टेप्स फॉलो करें और समय पर रूट प्रूनिंग करें।

हैप्पी गार्डनिंग!

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